शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 8 August 2018
हिंदी साहित्य में वीरबालकवाद / मनोहर श्याम जोशी
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09 अगस्त जन्मदिन पर विशेष वीरबालकवाद क्या होता है? यह प्रश्न आपके उर में विह्वलता भरने लगे उससे पहले यह समझ लें...
Friday, 2 March 2018
डोले बयरिया से अमवा की डरिया, चुनरिया पिउ की डगर बनि जाय..
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मेरा एक मित्र था दीवाना। ये उसका उपनाम था। घर का नाम और। सचमुच दीवानगी के लहजों में लिपटा उपनाम उसके हावभाव पर खूब फबता था। एक बड़े महाकवि ...
2 comments:
Wednesday, 28 February 2018
मुंह पर पचारा पोते भांग में टुन्न सुदामा चाचा
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जब भी होली के दिन आते हैं, नानी की यादें आंखें नम कर देती हैं। नानी मां के कच्चे मकान के सामने जन-मानुस जैसे बूढ़े बरगद और नीम-जामुन के त...
Tuesday, 27 February 2018
जाने कहां खो गई प्रसाद जी की वह पांडुलिपि
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कभी-कभी कोई-कोई पश्चाताप जीवन भर पीछा करता रहता है। एक ऐसा ही वाकया मेरे भी अतीत का हिस्सा रहा है। दरअसल, एक मित्र 'पिंक' को सराह...
Sunday, 25 February 2018
चकई कs चकधुम, मकई कs लावा...
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जीवन में कभी कोई ऐसा भी वाकया गुजरता है, भुलाए न भूले। वह 1984 की एक शाम थी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के सामने एक चाय की दुकान पर तनावग्रस्त बै...
पत्र-कार, मालिक का तलवा और चमचों की पंचाट
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घुड़की भी एक कला है। इसके कई रूप हैं। रोब-रुतबे का प्रदर्शन घुड़की है। मैंने ऐसे घुड़कीबाज नामवरों को मीडिया की दुनिया में बहुत करीब से देख...
Friday, 23 February 2018
आजकल तो सबसे ज्यादा कविता नहीं, चुटकले पढ़े जा रहे - नरेश सक्सेना
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प्रतिष्ठित कवि नरेश सक्सेना कहते हैं- कविता के कम या अधिक पढ़े जाने के प्रश्न का जवाब हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता क्योंकि हां और ना...
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