शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 31 August 2016
यशपाल की अमर कहानी...... 'फूलो का कुर्ता'
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हमारे यहां गांव बहुत छोटे-छोटे हैं. कहीं-कहीं तो बहुत ही छोटे. दस-बीस घर से लेकर पांच-छह घर तक और बहुत पास-पास. एक गांव पहाड़ की तलछटी मे...
Thursday, 4 August 2016
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Saturday, 23 July 2016
नहीं रहे नीलाभ अश्क
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प्रसिद्ध साहित्यकार उपेंद्रनाथ अश्क के पुत्र एवं जाने माने लेखक-रंगकर्मी नीलाभ अश्क (70) नहीं रहे। जीवन के आखिरी दिनो में उन्हें असहनीय घ...
Wednesday, 6 July 2016
आसान नहीं है कमलाराम नौटियाल हो जाना / रंजिता प्रकाश
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देहरादून में पिछले दिनो कामरेड कमलाराम नौटियाल स्मृति सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में अपने काम से उत्प्रेरित करने वाली हस्तियों ...
किताबों की दुनिया
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Wednesday, 29 June 2016
कोई क्यों नहीं चल रहा साथ मेरे / जयप्रकाश त्रिपाठी
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हुई शाम मेरी सवेरे-सवेरे, कोई क्यों नहीं चल रहा साथ मेरे । चला था जहां से, वहीं का वहीं हूं, अकेले-अकेले मैं हूं भी, नहीं हूं, स्वयं इस ...
2 comments:
Sunday, 1 May 2016
मेरा समय / जयप्रकाश
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मेरा समय चरमरा रहा है। अंदर खामोशी से टूट-फूट रहा है....चरर-मरर, चट्ट-चट्ट। जैसे श्मशान पर पसलियां चटकती हैं। हवाओं में असहनीय चिरायंध है। ...
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