शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 6 July 2016
आसान नहीं है कमलाराम नौटियाल हो जाना / रंजिता प्रकाश
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देहरादून में पिछले दिनो कामरेड कमलाराम नौटियाल स्मृति सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में अपने काम से उत्प्रेरित करने वाली हस्तियों ...
किताबों की दुनिया
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Wednesday, 29 June 2016
कोई क्यों नहीं चल रहा साथ मेरे / जयप्रकाश त्रिपाठी
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हुई शाम मेरी सवेरे-सवेरे, कोई क्यों नहीं चल रहा साथ मेरे । चला था जहां से, वहीं का वहीं हूं, अकेले-अकेले मैं हूं भी, नहीं हूं, स्वयं इस ...
2 comments:
Sunday, 1 May 2016
मेरा समय / जयप्रकाश
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मेरा समय चरमरा रहा है। अंदर खामोशी से टूट-फूट रहा है....चरर-मरर, चट्ट-चट्ट। जैसे श्मशान पर पसलियां चटकती हैं। हवाओं में असहनीय चिरायंध है। ...
जयप्रकाश
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आंख क्यों फिर से छलक आई है, सूख जाती क्यों रोशनाई है, कोई मेरा लिखा पढ़े-न-पढ़े, मैंने लिखने की कसम खाई है।
Tuesday, 22 March 2016
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Thursday, 10 March 2016
शब्द हैं वहां तक / जयप्रकाश
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जहां तक पृथ्वी, आकाश, आग-पानी, हवा है, अंधेरे को चीरते हुए जहां तक रोज सुबह होती है, सूरज उगता है, दिन खिलखिला उठते हैं, थिर-स्थिर होक...
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