शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Thursday, 10 March 2016
शब्द हैं वहां तक / जयप्रकाश
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जहां तक पृथ्वी, आकाश, आग-पानी, हवा है, अंधेरे को चीरते हुए जहां तक रोज सुबह होती है, सूरज उगता है, दिन खिलखिला उठते हैं, थिर-स्थिर होक...
Wednesday, 16 December 2015
जिसकी उंगली है रिमोट पर वो है सबसे ग्रेट
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""...सुनो बाबू जी, ये जो दस-दस लाख के गेट वाली कोठियां देख रहे हो न, इन सबकी अपनी-अपनी कथा-कहानी है। पढ़े-लिखे लगते हो। फुर्सत लग...
Tuesday, 10 November 2015
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Tuesday, 3 November 2015
जयप्रकाश त्रिपाठी
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प्यार की बातें करने वाले, देह से बाहर आओ तो, प्यार के भूखे इंसानों पर भी कुछ शब्द लुटाओ तो...... रचो न मिथ्या, जन-गण-मन के साथ चलो दो-...
Saturday, 31 October 2015
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मीडिया पर केंद्रित एवं शीघ्र प्रकाश्य मेरी नयी पुस्तक.... खबर फरोश
Monday, 26 October 2015
मेरी पीड़ा के लोग / जयप्रकाश त्रिपाठी
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मैंने जब-जब लिखना चाहा, कभी नहीं लिख पाया तुमको, मैंने जब-जब पढ़ना चाहा, कभी नहीं पढ़ पाया तुमको, तुम इतने, क्यों ऐसे-ऐसे..... लिखना-पढ़न...
Sunday, 27 September 2015
अथ फेसबुक प्रपंच
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दो-तीन वर्षों में जाना-पहचाना है कि फेसबुक पर दो तरह के प्राणी विचरते हैं। सच्चे मन के विद्वान-मनीषी और भांति-भांति के लंपट। विद्वान-मनीषी ...
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