शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 3 November 2015
जयप्रकाश त्रिपाठी
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प्यार की बातें करने वाले, देह से बाहर आओ तो, प्यार के भूखे इंसानों पर भी कुछ शब्द लुटाओ तो...... रचो न मिथ्या, जन-गण-मन के साथ चलो दो-...
Saturday, 31 October 2015
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मीडिया पर केंद्रित एवं शीघ्र प्रकाश्य मेरी नयी पुस्तक.... खबर फरोश
Monday, 26 October 2015
मेरी पीड़ा के लोग / जयप्रकाश त्रिपाठी
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मैंने जब-जब लिखना चाहा, कभी नहीं लिख पाया तुमको, मैंने जब-जब पढ़ना चाहा, कभी नहीं पढ़ पाया तुमको, तुम इतने, क्यों ऐसे-ऐसे..... लिखना-पढ़न...
Sunday, 27 September 2015
अथ फेसबुक प्रपंच
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दो-तीन वर्षों में जाना-पहचाना है कि फेसबुक पर दो तरह के प्राणी विचरते हैं। सच्चे मन के विद्वान-मनीषी और भांति-भांति के लंपट। विद्वान-मनीषी ...
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Friday, 25 September 2015
मध्य प्रदेश के बाबा कालू दास का दर्द
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........ सीधी, शहडोल, सागर, विदिशा, उमरिया आदि ऐसे जिले, जहां के लाखों बाशिंदों का दर्द पन्नों पर दर्ज नहीं। इतनी कड़वी सच्चाइयां कि जो जान...
Thursday, 24 September 2015
रंजीता के शब्द
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Tum kavi udas na hona Tum kavi nirash na hona, Tab vi nahi jab jeewan ke gahantam andhero me Tumhe kuch na sujhta ho, Ya tab jab tanhai...
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Tuesday, 22 September 2015
जयप्रकाश त्रिपाठी
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जो है, क्या-क्या है, जो नहीं है, क्या नहीं है, मेरे पास, उनके पास...। सब चेहरे, सब खुशियां, सब सुबहें उनके वश में, उजियारे, रंग सारे, उनक...
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