शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 7 March 2015

वह जादू की झप्पी-सी मुस्कान / जयप्रकाश त्रिपाठी

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वह लड़ाई जारी रखे हुए थे। अपनी तरह से लड़ रहे थे। अनवरत लड़ रहे थे रंगकर्म के बहाने। आगरा प्रवास के दौरान वह मुझसे अक्सर कहते थे- 'क्...

मेरे शहर की स्त्रियां

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(8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस) मेरे शहर की स्त्रियां...... न फेमिनिस्ट, न कॉरपोरेट न ये करती हैं बड़े-बड़े दावे-प्रतिदावे, धर्मश...
Thursday, 5 March 2015

जीवन जीने की कला / जयप्रकाश त्रिपाठी

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महानता का उच्च आत्मालाप, जहँ-तहँ अवसरवादी श्रद्धाभिभूति, नामवर 'बड़ों' की चाटुकारिता और अ-पठित, अ-घोर, अ-मनुष्यता  है उसके जीवन जीन...

मैं उन्हें भला क्या जवाब देता

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उन दिनो लखनऊ से 'सुकवि विनोद' पत्रिका प्रकाशित होती थी। संपादक थे डा. लक्ष्‍मीशंकर मिश्र 'निशंक'। उस पत्रिका के माध्यम से...
Wednesday, 4 March 2015

सब मित्र परिवार को मिलें खुशियां अपरंपार

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2 comments:
Tuesday, 3 March 2015

रवीश कुमार पर क्या ये दोनो जानकारियां सही हैं?

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जानकारी-1 दीपू नसीर ने लिखा है - 'रवीश से बात करते - करते योगेन्द्र यादव की आंखे गीली हुई..' जानकारी-2 मीडिया मंच पर खबर है - ...
Monday, 2 March 2015

साहित्यिक इतिहास के दो 'नामवर' अध्याय

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अध्याय-1  प्रसंग-अप्रसंग : नामवर सिंह के जीवन के कुछ अनुद्धाटित तथ्य       समय समय पर हिन्दी जगत ने नामवर सिंह की साहित्यक और जीवन यात...
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