शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Sunday, 1 February 2015

मेरी पाठशाला पांच : जिनको, अक्सर पढ़ता रहता हूं

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हिंदी अकादमी, दिल्ली और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से सम्मानित, स्वभाव से अत्यंत सहज रूपसिंह चंदेल मेरे जनपद के गांव नौगवाँ से हैं। दिल्ल...

मेरी पाठशाला चार : जिनको अक्सर पढ़ता रहता हूं

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आज-दिन जबकि रात-रात भर नींद नहीं आती, आंखें खुली-खुली, जाने अंधे कमरे के आरपार क्या ढूंढती रहती हैं, तब.....''अच्छे बच्चे, आधा चा...
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मेरी पाठशाला तीन : जिनको अक्सर पढ़ता रहता हूं

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''रोज़ सुबह, मुँह-अंधेरे दूध बिलोने से पहले, मां चक्की पीसती, और मैं घुमेड़े में आराम से सोता...'' रमेश शर्मा उर्फ दिवि...
Saturday, 31 January 2015

मेरी पाठशाला दो : जिनको अक्सर पढ़ता रहता हूं

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  मँजी हुई शर्म का जनतंत्र, आलोचना : साहित्य, समाज और जनतंत्र, बाजारवाद और जनतंत्र, आजादी और राष्ट्रीयता का मतलब, छूटे हुए क्षण, बुधराम,...
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मेरी पाठशाला एक : जिनको पढ़ता रहता हूं

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एक है दुनिया रंग-विरंगी, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल की। जैसा लिखते हैं, बोल-चाल में भी उतने ही स्वादिष्ट। फेसबुक पर तो प्रतिदिन रहते ही है...
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Thursday, 29 January 2015

मित्रों के लिए कुछ ताजा पंक्तियां/जयप्रकाश त्रिपाठी

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कितना अपना, वो रोजी-रोटी का मारा,  लगता है क्यों थका-थका सा, हारा-हारा फिर भी अपनी लोहे की मुट्ठी तक तना हुआ.......... रुका नहीं, मन दु...

मेरे नये काव्य संकलन की कुछ पंक्तियां

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चाहे पथ पर फूल बिछा दे चाहे कोई साज सजा दे चाहे कोई लाज लजा दे चाहे कोई सुबह जगा दे चाहे कोई शाम सुला दे मैं अपने मन का बंजारा.........
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