शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Thursday, 29 January 2015
मित्रों के लिए कुछ ताजा पंक्तियां/जयप्रकाश त्रिपाठी
›
कितना अपना, वो रोजी-रोटी का मारा, लगता है क्यों थका-थका सा, हारा-हारा फिर भी अपनी लोहे की मुट्ठी तक तना हुआ.......... रुका नहीं, मन दु...
मेरे नये काव्य संकलन की कुछ पंक्तियां
›
चाहे पथ पर फूल बिछा दे चाहे कोई साज सजा दे चाहे कोई लाज लजा दे चाहे कोई सुबह जगा दे चाहे कोई शाम सुला दे मैं अपने मन का बंजारा.........
Sunday, 25 January 2015
पत्रकारिता पर मेरी दूसरी किताब- क्लास रिपोर्टर
›
मेरा तीसरा काव्य-संकलन
›
Saturday, 24 January 2015
पी. साइनाथ की 'परी': उम्मीद पर भी सवाल बनते हैं /अभिषेक श्रीवास्तव
›
बीते दस साल में अगर याद करें तो मुझे नहीं याद आता कि इंडिया इंटरनेशनल सेंटर जैसे एक अपमार्केट अभिजात्य आयोजन स्थल पर किसी कार्यक्रम में...
क्लास रिपोर्टर/जयप्रकाश त्रिपाठी
›
प्रो. संजीव भानावत : कुल बाईस अध्यायों में प्रस्तुत 'क्लास रिपोर्टर' पत्रकारिता के छात्रों के लिए आधारभूत ग्रंथ है। इसमें मीडिया ...
1 comment:
Friday, 23 January 2015
एक दूसरे के लिए "सरकार" हैं मोदी और भागवत !/पुण्यप्रसून बाजपेयी
›
संघ परिवार से जो गलती वाजपेयी सरकार के दौर में हुई, वह गलती मोदी सरकार के दौर में नहीं होगी। जिन आर्थिक नीतियो को लेकर वाजपेयी सरकार को क...
‹
›
Home
View web version