शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 21 January 2015
पढ़ते-सुनते-देखते हुए
›
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल को पढ़ते-सुनते-देखते हुए कई सवाल जेहन में कौंध रहे हैं। मसलन कि इस कथित साहित्य महोत्सव में कितना साहित्य, कितनी स...
Tuesday, 20 January 2015
क्रांति-क्रांति कुर्सी
›
क्या कहें, क्रांति-क्रांति कुदराते सियासी मैराथन में कूद पड़े बूढ़े अन्ना के दोनो पट्ट शिष्य... तो सीएम बने उनमें जो भी, क्या मानें कि ह...
2 comments:
Monday, 19 January 2015
मुरुगन पुनरुज्जीवित होंगे/प्रणय कृष्ण
›
तमिल लेखक पेरूमल मुरुगन ने 14 जनवरी को फेसबुक पर लिखा, "लेखक पेरूमल मुरुगन मर गया. वह भगवान नहीं है, लिहाजा वह खुद को पुनरुज्जीवित ...
Sunday, 18 January 2015
हमेशा रहेगी किताबों की जरूरत/प्रेमचंद गांधी
›
उस दुनिया की कल्पना करना कितना भयावह है, जिसे किताबों के बिना जीना पडता है। लेकिन सच्चाई यही है, आज भी विश्व की करीब पचास फीसद जनता पु...
Thursday, 15 January 2015
जंगल-मंगल/जयप्रकाश त्रिपाठी
›
() जो कुछ है, इतना बस है, लगता है, ये भी बरबस है सब झूठे-झूठे शब्दों-सा अब भी वो क्यों जस-का-तस है जैसे ...
Wednesday, 14 January 2015
हमारे समाज में 'लड़की' समझ से परे की चीज/फहमीदा रियाज
›
पाकिस्तान के सिंध राज्य में रहने वाली तरक्की पसंद अदीबा, शायरा फहमीदा रियाज 'गुफ्तगू' से बातचीत में बताती हैं- 'जो मन में आता ह...
Monday, 12 January 2015
थोथे मुद्दे छोड़े समाज/प्रीतीश नंदी
›
आप ऐसे कितने हिंदुओं से रोज मिलते हैं, जो बाहर जाकर मुस्लिमों और ईसाइयों का धर्मांतरण करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ये लोग भारत...
‹
›
Home
View web version