शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Thursday, 25 December 2014

विश्व पुस्तक मेले की पदचाप और वर्ष 2013-14 की कुछ किताबें

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विश्व पुस्तक मेले की पदचाप अभी से सुनायी देने लगी है। इस बार मेला 14 फरवरी 2015 से शुरू होने वाला है। तय है, ऐसे में रचनाकारों और सुधी पा...

नाजिम हिकमत की अन्तिम कविता

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(चित्र : अपनी पत्नी पिराये के साथ एक भावपूर्ण मुद्रा में नाज़िम हिकमत ) क्या मेरे शव को ले जाया जायेगा नीचे अपने आँगन से ? तुम कैसे उतार...
Tuesday, 23 December 2014

एक खाली कोख / एलिसन सोलोमन

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मैंने नहीं देखी कोई कविता मासिकधर्म की बदसूरती के बारे में वैसे ऋतुचक्र चमत्‍कारिक होते हैं चंद्रमा की चाल नियंत्रित रखती हैं हमारी जि...
1 comment:
Monday, 22 December 2014

मैंने मलाला को उड़ने दिया, पर नहीं काटे / जियाउद्दीन युसुफजई

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पितृसत्तात्मक समाजों और आदिवासी समाजों में आमतौर पर पिता को बेटों से जाना जाता है। लेकिन मैं उन कुछ पिताओं में से हूं, जो अपनी बेटी से जा...
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अमेरिकी कवि वाल्ट ह्विटमैन / अनुवाद लाल्टू

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मैं देह का कवि हूँ और मैं आत्मा का कवि हूँ, स्वर्ग के सुख मेरे पास हैं और नर्क की पीड़ाएँ मेरे साथ हैं, सुखों को मैं बुनता हूँ और उन्हें ...

बुत हमको कहें काफ़िर / प्रियंवद

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कुछ दिन पहले हलीम मुस्लिम कॉलेज से 'दास्तान' पर शम्सुर्रहमान फ़ारूकी साहब का व्याख्यान सुन कर निकला तो मन उदास था। इससे पहले की शा...

पी साईंनाथ ने बनाया गांवों का अजायबघर / रवीश कुमार

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एक सुखद बदलाव ने दस्तक दी है और हम आप हैं कि आहट से बेख़बर हैं। बहुत से पत्रकार पेशे से निराश होकर कंपनियों के प्रवक्ता बन गए, नेताओं के ...
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