शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Friday, 19 December 2014
रोशनी के सबसे सच्चे टुकड़े / अतौल बहरामुग्लू
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बच्चों का कोई देश नहीं होता जिस तरह वे संभालते हैं अपना सिर वह होता है एक जैसा जिस तरह वे टकटकी लगाए देखते हैं, एक जैसी जिज्ञासा लगती ह...
चुगली / जयप्रकाश त्रिपाठी
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बहुत देखा है हवाओं का दिशाएं बदलना और पानी का समय पर तैरना, आईने की चुगली, खुसर-फुसर, चेहरे पर चेहरे रंगना-चढ़ना-उतरना...
बात मोदी, मीडिया और मक्खी की / विजय विद्रोही
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मीडिया पर हर नेता बरसता है, आजाद मीडिया हर दल की आंख में खटकता है। अगर राजनीतिक दलों का बस चले तो स्वतंत्र मीडिया के काम में इतने अडंग़े ...
लोकप्रिय शायर मुनव्वर राणा को वर्ष 2014 का साहित्य अकादमी पुरस्कार, सम्मान समारोह अगले वर्ष मार्च में
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Tuesday, 16 December 2014
ओ मेरे बच्चों / जयप्रकाश त्रिपाठी
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किसी ने अंधेरे से कह दिया है कि उजाले में घुल-मिल जाओ इस तरह और नजर न आओ
Monday, 15 December 2014
हमेशा देर कर देता हूँ मैं / मुनीर नियाज़ी
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ज़रूरी बात कहनी हो, कोई वादा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो, उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं। मदद करनी हो उसकी, यार का धाढ़...
तुमने ऐसा क्यों किया राधा / जयप्रकाश त्रिपाठी
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अब तो एक थी राधा; गुजरे चार वर्षों से अनायास मेरी पत्नी के साये की तरह। सुबह आना, शाम आना, मदद में जितना हो सके, घरेलू कामों में हाथ बंटा...
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