शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 16 December 2014
ओ मेरे बच्चों / जयप्रकाश त्रिपाठी
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किसी ने अंधेरे से कह दिया है कि उजाले में घुल-मिल जाओ इस तरह और नजर न आओ
Monday, 15 December 2014
हमेशा देर कर देता हूँ मैं / मुनीर नियाज़ी
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ज़रूरी बात कहनी हो, कोई वादा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो, उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं। मदद करनी हो उसकी, यार का धाढ़...
तुमने ऐसा क्यों किया राधा / जयप्रकाश त्रिपाठी
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अब तो एक थी राधा; गुजरे चार वर्षों से अनायास मेरी पत्नी के साये की तरह। सुबह आना, शाम आना, मदद में जितना हो सके, घरेलू कामों में हाथ बंटा...
Saturday, 13 December 2014
'हिंदुस्तान' से साभार
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कोई एक घर टूटने के बहाने/जयप्रकाश त्रिपाठी
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एक दिन यशस्वी शायर बशीर बद्र से बमुश्किल परिजनों ने फोन वार्ता करायी। वह गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं। बात करते समय मुंह से अस्पष्ट, टूटे-फूट...
Thursday, 11 December 2014
मैं हारा हुआ सूफ़ी /शहंशाह आलम
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सुना था पहले भी पखावज़, पखावज के भीतर पखावज सुना था चखा था पहले भी फल, फल के भीतर फल चखा था महसूसा था उतरती गर्मी को, चढ़ती बारिश को महसूस...
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Wednesday, 10 December 2014
लड़ती हुई लड़की/जयप्रकाश त्रिपाठी
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लड़कियां लड़ रही हैं, रच रही हैं दुनिया को, सब कुछ संवार रही हैं लड़कियां, कोई नहीं पहुंच पाता उनकी उड़ानों के आखिरी सिरे तक, लड़कियां...
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