शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Thursday, 11 December 2014

मैं हारा हुआ सूफ़ी /शहंशाह आलम

›
सुना था पहले भी पखावज़, पखावज के भीतर पखावज सुना था चखा था पहले भी फल, फल के भीतर फल चखा था महसूसा था उतरती गर्मी को, चढ़ती बारिश को महसूस...
2 comments:
Wednesday, 10 December 2014

लड़ती हुई लड़की/जयप्रकाश त्रिपाठी

›
लड़कियां लड़ रही हैं, रच रही हैं दुनिया को, सब कुछ संवार रही हैं लड़कियां, कोई नहीं पहुंच पाता उनकी उड़ानों के आखिरी सिरे तक, लड़कियां...
1 comment:

बच्चे/जयप्रकाश त्रिपाठी

›
बड़े हो जाते हैं जल्दी जल्दी और अजनबी हो जाते हैं बच्चे, जैसेकि और कुछ हुआ ही न हो, न होने वाला हो बड़ा, जल्दी जल्दी...।
Monday, 8 December 2014

दूधनाथ सिंह को भारत-भारती, ममता कालिया, पुन्नी, दिविक, जनमेजय भी सम्मानित

›
हिंदी संस्थान, लखनऊ में आयोजित 69वें साहित्यकार सम्मान समारोह में दूधनाथ सिंह को भारत भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके अलावा म...
Sunday, 7 December 2014

भुखमरी और अपराध बढ़ने का एक कारण जलवायु परिवर्तन भी / डा. अरविन्द सिंह

›
भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम होंगे। जलवायु परिवर्तन के फलस्वरुप कृषि उत्पादन में गिरावट के कारण मुद्रास...

रंग / जयप्रकाश त्रिपाठी

›
सुंदर-सुंदर रंगों वाले रंगे-बड़े-दुरंगे कहां कहां झूठे बसते हैं ..... मुंह से शहद, पीठ पीछे से हंसी हलाहल की बरसाते पल में मधुर प्रणाम औ...
Saturday, 6 December 2014

चेहरे / जयप्रकाश त्रिपाठी

›
आज वे सब लोग जाने क्यों पराये लग रहे हैं एक चेहरे पर कई चेहरे लगाये लग रहे हैं बेबसी में क्या किसी से रोशनी की भीख मांगें वे अंधेरी रात ...
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.