शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Sunday, 7 December 2014
भुखमरी और अपराध बढ़ने का एक कारण जलवायु परिवर्तन भी / डा. अरविन्द सिंह
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भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम होंगे। जलवायु परिवर्तन के फलस्वरुप कृषि उत्पादन में गिरावट के कारण मुद्रास...
रंग / जयप्रकाश त्रिपाठी
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सुंदर-सुंदर रंगों वाले रंगे-बड़े-दुरंगे कहां कहां झूठे बसते हैं ..... मुंह से शहद, पीठ पीछे से हंसी हलाहल की बरसाते पल में मधुर प्रणाम औ...
Saturday, 6 December 2014
चेहरे / जयप्रकाश त्रिपाठी
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आज वे सब लोग जाने क्यों पराये लग रहे हैं एक चेहरे पर कई चेहरे लगाये लग रहे हैं बेबसी में क्या किसी से रोशनी की भीख मांगें वे अंधेरी रात ...
क्या 16 मई के बाद मीडिया बदल गया? / पुण्यप्रसून बाजपेयी
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16 मई 2014 की तारीख के बाद क्या भारतीय मीडिया पूंजी और खौफ तले दफ्न हो गया। यह सवाल सीधा है लेकिन इसका जवाब किश्तों में है। मसलन कांग्रेस...
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Friday, 5 December 2014
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभक्तों का महान संगठन? / प्रभाष जोशी
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(अगर भारत माता की स्वतंत्रता के लिए क़ुरबान हो जाना ही देशभक्ति की कसौटी है तो संघ परिवारी तो उस पर चढ़े भी नहीं, खरे उतरने की तो बात ही ...
जादू जैसे शब्दों वाले हिन्दी नवगीत के आधार स्तम्भ देवेन्द्र कुमार बंगाली की वह लोकप्रिय कविता....
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एक पेड़ चांदनी लगाया है आंगने । फूले तो आ जाना एक फूल मांगने । ढिबरी की लौ जैसे लीक चली आ रही, बादल का रोना है, बिजली शरमा रही, मेरा...
Thursday, 4 December 2014
जो जितना गलत है, वो उतना सही है / जयप्रकाश त्रिपाठी
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इधर खालीपन है, उधर खालीपन है, कहीं कुछ नहीं है तो क्यों कुछ नहीं है! अकेले-अकेले मुसीबत के मेले करोड़ो के किस्से, हजारो झमेले चलन-बदचल...
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