शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 6 December 2014

चेहरे / जयप्रकाश त्रिपाठी

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आज वे सब लोग जाने क्यों पराये लग रहे हैं एक चेहरे पर कई चेहरे लगाये लग रहे हैं बेबसी में क्या किसी से रोशनी की भीख मांगें वे अंधेरी रात ...

क्या 16 मई के बाद मीडिया बदल गया? / पुण्यप्रसून बाजपेयी

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16 मई 2014 की तारीख के बाद क्या भारतीय मीडिया पूंजी और खौफ तले दफ्न हो गया। यह सवाल सीधा है लेकिन इसका जवाब किश्तों में है। मसलन कांग्रेस...
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Friday, 5 December 2014

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभक्तों का महान संगठन? / प्रभाष जोशी

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(अगर भारत माता की स्वतंत्रता के लिए क़ुरबान हो जाना ही देशभक्ति की कसौटी है तो संघ परिवारी तो उस पर चढ़े भी नहीं, खरे उतरने की तो बात ही ...

जादू जैसे शब्दों वाले हिन्दी नवगीत के आधार स्तम्भ देवेन्द्र कुमार बंगाली की वह लोकप्रिय कविता....

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एक पेड़ चांदनी लगाया है आंगने । फूले तो आ जाना एक फूल मांगने । ढिबरी की लौ जैसे लीक चली आ रही, बादल का रोना है, बिजली शरमा रही, मेरा...
Thursday, 4 December 2014

जो जितना गलत है, वो उतना सही है / जयप्रकाश त्रिपाठी

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इधर खालीपन है, उधर खालीपन है, कहीं कुछ नहीं है तो क्यों कुछ नहीं है! अकेले-अकेले मुसीबत के मेले करोड़ो के किस्से, हजारो झमेले चलन-बदचल...
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संजीव भट्ट

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उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो कि पहेली... उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो की पहेली मैं मीर की हमराज हूँ ,ग़ालिब की सहेली दक्कन की वली ने मुझे ग...

नरेश सक्सेना

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कोई-कोई वृक्ष बिल्कुल मनुष्यों की तरह होते हैं वे न फल देते हैं, न छाया, एक हरे सम्मोहन से खींचते हैं और पहुँच में आते ही दबोच कर सारा ख़ू...
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