शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Friday, 5 December 2014
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभक्तों का महान संगठन? / प्रभाष जोशी
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(अगर भारत माता की स्वतंत्रता के लिए क़ुरबान हो जाना ही देशभक्ति की कसौटी है तो संघ परिवारी तो उस पर चढ़े भी नहीं, खरे उतरने की तो बात ही ...
जादू जैसे शब्दों वाले हिन्दी नवगीत के आधार स्तम्भ देवेन्द्र कुमार बंगाली की वह लोकप्रिय कविता....
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एक पेड़ चांदनी लगाया है आंगने । फूले तो आ जाना एक फूल मांगने । ढिबरी की लौ जैसे लीक चली आ रही, बादल का रोना है, बिजली शरमा रही, मेरा...
Thursday, 4 December 2014
जो जितना गलत है, वो उतना सही है / जयप्रकाश त्रिपाठी
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इधर खालीपन है, उधर खालीपन है, कहीं कुछ नहीं है तो क्यों कुछ नहीं है! अकेले-अकेले मुसीबत के मेले करोड़ो के किस्से, हजारो झमेले चलन-बदचल...
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संजीव भट्ट
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उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो कि पहेली... उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो की पहेली मैं मीर की हमराज हूँ ,ग़ालिब की सहेली दक्कन की वली ने मुझे ग...
नरेश सक्सेना
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कोई-कोई वृक्ष बिल्कुल मनुष्यों की तरह होते हैं वे न फल देते हैं, न छाया, एक हरे सम्मोहन से खींचते हैं और पहुँच में आते ही दबोच कर सारा ख़ू...
समाज और सत्ता के दो रंग
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जर्मनी में हज़ारों लोगों ने बहादुर लड़की टूची को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने दो किशोर लड़कियों को छेड़खानी से बचाने में अपनी जान गंवा दी. ...
Wednesday, 3 December 2014
सोशल जस्टिस बेंच
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कारपोरेट मीडिया के अपने कर्मचारियों के साथ मनमाना बर्ताव और सोशल मीडिया पर उनकी गूंज के मामले भी क्या नवगठित 'सोशल जस्टिस बेंच’ के सा...
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