शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 3 December 2014
सोशल जस्टिस बेंच
›
कारपोरेट मीडिया के अपने कर्मचारियों के साथ मनमाना बर्ताव और सोशल मीडिया पर उनकी गूंज के मामले भी क्या नवगठित 'सोशल जस्टिस बेंच’ के सा...
1 comment:
अंजनी कुमार
›
एक सरकार डरती है दूसरी सरकार से, दूसरी सरकार डरती है अपने आप से, नेता डरता है मीडिया संस्थान से, मीडिया डरता है अपनी अवैध खदान से, न्या...
Tuesday, 2 December 2014
GOOD MORNING
›
अच्छी सूरत को संवरने की जरूरत क्या है सादगी में भी कयामत की अदा होती है....
मनमोहन
›
इन शब्दों में, वह समय है, जिसमें मैं रहता हूँ ग़ौर करने पर उस समय का संकेत भी यहीं मिल जाता है। जो न हो लेकिन मेरा अपना है यहाँ कुछ जग...
Monday, 1 December 2014
खोजी पत्रकारिता की मिसाल / आनंद जोशी
›
आई.सी.आई.जे. की रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में कंपनियों और ट्रस्टों के जरिए निवेश तथा गोपनीय वित्तीय लेन-देन करने वाले 170 देशों की सूची उ...
Saturday, 29 November 2014
'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत गणेश शंकर विद्यार्थी की टिप्पणी
›
‘आज हमें जिहाद की जरूरत है- इस धर्म के ढोंग के खिलाफ, इस धार्मिक तुनकमिजाजी के खिलाफ। जातिगत झगड़े बढ़ रहे हैं। खून की प्यास लग रही है। ए...
'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत माखनलाल चतुर्वेदी
›
'मैंने तो जर्नलिज्म में साहित्य को स्थान दिया था। बुद्धि के ऐरावत पर म्यूनिसिपल का कूड़ा ढोने का जो अभ्यास किया जा रहा है अथवा ऐसे प्...
‹
›
Home
View web version