शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 2 December 2014

GOOD MORNING

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अच्छी सूरत को संवरने की जरूरत क्या है सादगी में भी कयामत की अदा होती है....

मनमोहन

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इन शब्दों में, वह समय है, जिसमें मैं रहता हूँ ग़ौर करने पर उस समय का संकेत भी यहीं मिल जाता है। जो न हो लेकिन मेरा अपना है यहाँ कुछ जग...
Monday, 1 December 2014

खोजी पत्रकारिता की मिसाल / आनंद जोशी

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आई.सी.आई.जे. की रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में कंपनियों और ट्रस्टों के जरिए निवेश तथा गोपनीय वित्तीय लेन-देन करने वाले 170 देशों की सूची उ...
Saturday, 29 November 2014

'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत गणेश शंकर विद्यार्थी की टिप्पणी

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‘आज हमें जिहाद की जरूरत है- इस धर्म के ढोंग के खिलाफ, इस धार्मिक तुनकमिजाजी के खिलाफ। जातिगत झगड़े बढ़ रहे हैं। खून की प्यास लग रही है। ए...

'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत माखनलाल चतुर्वेदी

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'मैंने तो जर्नलिज्म में साहित्य को स्थान दिया था। बुद्धि के ऐरावत पर म्यूनिसिपल का कूड़ा ढोने का जो अभ्यास किया जा रहा है अथवा ऐसे प्...

'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत योगेंद्र यादव की टिप्पणी

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अधिकांश अख़बार और टीवी चैनल पूंजीपति या कंपनी की मिलकीयत में हैं और मालिक मीडिया का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक हितों के लिए करना चाहता ...

जीवन जगत

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आदमी के आंसुओं में हंसी के भी रस्ते हैं, रोओ किसी एक पर हजार लोग हंसते हैं। कभी फुटपाथ, कभी पटरी के आसपास, दिन भर उजड़ते हैं, रात भर बसत...
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