शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 29 November 2014

'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत गणेश शंकर विद्यार्थी की टिप्पणी

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‘आज हमें जिहाद की जरूरत है- इस धर्म के ढोंग के खिलाफ, इस धार्मिक तुनकमिजाजी के खिलाफ। जातिगत झगड़े बढ़ रहे हैं। खून की प्यास लग रही है। ए...

'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत माखनलाल चतुर्वेदी

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'मैंने तो जर्नलिज्म में साहित्य को स्थान दिया था। बुद्धि के ऐरावत पर म्यूनिसिपल का कूड़ा ढोने का जो अभ्यास किया जा रहा है अथवा ऐसे प्...

'मीडिया हूं मैं' से उद्धृत योगेंद्र यादव की टिप्पणी

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अधिकांश अख़बार और टीवी चैनल पूंजीपति या कंपनी की मिलकीयत में हैं और मालिक मीडिया का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक हितों के लिए करना चाहता ...

जीवन जगत

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आदमी के आंसुओं में हंसी के भी रस्ते हैं, रोओ किसी एक पर हजार लोग हंसते हैं। कभी फुटपाथ, कभी पटरी के आसपास, दिन भर उजड़ते हैं, रात भर बसत...

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प्यासे-प्यासे ओस चाटते रहे मृदुल जी, बिना सजा के जेल काटते रहे मृदुल जी, समय कटे कैसे, अब एक-एक दिन भारी, जीवन भर आदर्श बांटते रहे मृदुल...

विज्ञान लेखन / ओमप्रकाश कश्यप

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सर्वप्रथम यह जान लेना उचित होगा कि आखिर विज्ञान लेखन है क्या? वह कौन-सा गुण है जो कथित विज्ञान साहित्य को सामान्य साहित्य से अलग कर, उसे वि...
Friday, 28 November 2014

पतित वैश्वीकरण

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आज जबकि लद्दाख से लिस्बन तक, चीन से पेरू तक; पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में—वेशभूषा, जीन्स, बाल काढ़ने के तरीके, टी-शर्टस, जॉगिंग, खाने ...
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