शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Friday, 28 November 2014
पतित वैश्वीकरण
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आज जबकि लद्दाख से लिस्बन तक, चीन से पेरू तक; पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में—वेशभूषा, जीन्स, बाल काढ़ने के तरीके, टी-शर्टस, जॉगिंग, खाने ...
मां/मोहनजीत
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मैं उस मिट्टी में से उगा हूँ जिसमें से माँ लोकगीत चुनती थी हर नज्म लिखने के बाद सोचता हूँ- क्या लिखा है? माँ कहाँ इस तरह सोचती होगी! ...
Thursday, 27 November 2014
मेरे पास, उनके पास / जयप्रकाश त्रिपाठी
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( 'जग के सब दुखियारे रस्ते मेरे हैं' संकलन से) जो है, क्या-क्या है, जो नहीं है, क्या नहीं है, मेरे पास, उनके पास...। सब चे...
कमेटी ऑफ कंसर्डं जर्नलिस्ट’ के 9 कमेंट्स
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अमेरिका के हावर्ड फैकल्टी क्लब में 1977 में गठित लेखकों और पत्रकारों की ‘कमेटी ऑफ कंसर्डं जर्नलिस्ट’ के पत्रकारिता पर 9 कमेंट्स....... 1...
स्त्री : पांच / चन्द्रकान्त देवताले
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जिनने तस्वीरें खींचीं, घायल हुए तस्वीरों में देखो कैसे मुस्करा रहे हैं प्रमुदित कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं भरोसा करना मुश्किल है इन तस...
स्त्री : चार / बोधिसत्व
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दीदी बनारस में रहती है, पहले किसी पिंजरे में रहती थी, उसके पहले किसी घोंसले में, रहती थी उड़ती थी ख़ूब ऊपर और दूर-दूर । उसके भी पहले छ...
स्त्री : तीन / विचिस्लाव कुप्रियानफ़
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पुरूष का हाथ स्त्री और बच्चे की हथेलियाँ थाम उठता है पक्ष में या विरोध में और विरोध में ठहरकर निर्माण करता है, क़िताबों के पन्ने पलटता...
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