शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 22 November 2014

बेचारे हम / जयप्रकाश त्रिपाठी

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जीते हुए हम, हारे हुए हम,  हारे हुए लोगों के सहारे हुए हम ।  बाबू हुए तुम, राजा हुए तुम,  आदमी बेचारे के बेचारे हुए हम। आंख-आंख पर शी...
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घरेलू कामगार स्त्रियाँ: हक से वंचित एक बड़ी आबादी / शाकम्भरी

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घरों में काम करने वाली महिलाओं, लड़कियों पर अत्याचार, शोषण की घटनाएँ हमें आये दिन देखने और सुनने को मिलती है। मध्यवर्गीय परिवारों, नौकरीशु...

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जॉर्जिया ओकीफ़ की ये पेंटिंग किसी भी महिला पेंटर की सबसे महँगी कलाकृति बन गई है. 'जिम्सन वीड/व्हाइट फ्लॉवर नंबर-एक' नाम की पेंटिं...
Friday, 21 November 2014

लिख और दिख

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'कलम अपनी साध, मन की बात बिल्कुल ठीक कह एकाध, जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख, और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख....चीज़ ऐसी दे कि...

गुल्लक / पवन करण

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बिटिया बड़े जतन से सिक्के जोड़ती कान से सटाकर देखती बजाकर गुल्लक में सिक्के खन-खन करते पिता के सामने गुल्लक रखती उसकी हथेली पर गुल्लक...

गरीब वेश्या की मौत / लीलाधर जगूड़ी

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कल-पुर्जों की तरह थकी टांगें, थके हाथ उसके साथ जब जीवित थी लग्गियों की तरह लंबी टांगें जूतों की तरह घिसे पैर लटके होठों के आस-पास टट्टु...

रसोईघर की दीवार से फ़ेसबुक की दीवार तक / संजीव चंदन

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लिखने की छटपटाहट ने आज से 150 साल पहले रसोई घर की दीवारों पर अपना स्पेस बनाया. बांग्ला की पहली आत्मकथा (अमार जीबॉन -1876) की लेखिका राससु...
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