शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 19 November 2014
परदे पर शब्द मुझे वैसे ही लगते हैं जैसे नीले आसमान में तारे / अरुण कमल
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शुरू में कविता बोली जाती थी। सुनी जाती थी। मुँहा-मुँही फैलती थी। कंठस्थ होती थी। इस क्रम में कुछ हेर-फेर भी होता होगा। जितने मुँह और जितन...
Tuesday, 18 November 2014
वे बंधक रख रहे हैं देश, बच्चों ताली बचाओ
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और रेलवे स्टेशनों पर विदेशियों के कप-प्लेट धोने के लिए तैयार हो जाओ इसी तरह चुपके-चुपके आये थी ईस्ट इंडिया कंपनी ..... रक्षा क्षेत्र में ...
1 comment:
जियो पारसी
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एक शोध के मुताबिक समाज में तेजी से पारसियों की संख्या घट रही है। 40 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे में केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग की अनुश...
हलाहल / जयप्रकाश त्रिपाठी
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सुंदर-सुंदर रंगों वाले रंगे-बड़े-दुरंगे कहां कहां झूठे बसते हैं ..... मुंह से शहद, पीठ पीछे से हंसी हलाहल की बरसाते पल में मधुर प्रणाम और...
एक इंजीनियर कैसे बना 'संत रामपाल' / अंकुर जैन
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ख़ुद को संत कबीर का अवतार और भगवान घोषित करने वाले संत रामपाल की कहानी किसी हिंदी फिल्म के किरदार से काम नहीं. उनके समर्थकों के लिए वो ना...
हरियाणा में बाबा रामपाल के आश्रम में घुसी पुलिस, खूनी टकराव, आपरेशन जारी
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बाबा के समर्थकों से खूनी टकराव, अनेक पुलिसकर्मी घायल, पेट्रोल बमो से पुलिस पर हमला, बाबा के आश्रम से भाग निकलने की अफवाहे, पुलिस कार्रवाई...
Monday, 17 November 2014
सुखीराम-दुखीराम
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दुखीराम : हरियाणा वाले बाबा के अपने कमांडो, उत्तरांचल वाले बाबा को जेडश्रेणी कमांडो.... राम राम सुखीराम ये क्या हो रहा है.. सुखीराम : जब इ...
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