शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 12 November 2014
मन भर आया / जयप्रकाश त्रिपाठी
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प्रायः याद किया करता हूं, किसको-किसको सुख पहुंचाया । किसे-किसे, क्यों भूल गया, किसको पल भर भी भूल न पाया । पूरा घर खंडहर हो गया, गांव ...
खुशियां / जयप्रकाश त्रिपाठी
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मां की आंखों रोयी गुड़िया हिचक-हिचक कर, रोते-रोते .... और एक दिन सुबह उठी, मां-सी अपने नन्हे ईश्वर की आंखों में खुशियां बरसाती ।...
जग के सब दुखियारे रस्ते मेरे हैं
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मैं समस्त सुबहों-शामों में शामिल हूं, मैं जन-मन के संग्रामों में शामिल हूं मैं तरु की पत्ती-पत्ती पर चहक रहा, मैं रोटी की लौ में निश...
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खुशियों के ये सारे रस्ते मेरे हैं, जग के सब दुखियारे रस्ते मेरे हैं। (नये संकलन से)
Tuesday, 11 November 2014
प्रभाष जोशी की पांचवीं पुण्यतिथि पर स्मृति सभा
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प्रभाष परम्परा न्यास और मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने वसुंधरा (गाजियाबाद) स्थित इंस्टीट्शंस के मेवाड़ ऑडिटोरियम में सुप्रसिद्ध पत्रकार द...
थके नहीं, तुम ऐसे क्यों हो / जयप्रकाश त्रिपाठी
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मैंने जब-जब लिखना चाहा, कभी नहीं लिख पाया तुमको, मैंने जब-जब पढ़ना चाहा, कभी नहीं पढ़ पाया तुमको, तुम इतना क्यों ऐसे-ऐसे..... मैंने...
Monday, 10 November 2014
मैं इन रस्तों का मतवाला राही हूं/जयप्रकाश त्रिपाठी
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खुशियों के ये सारे रस्ते मेरे हैं, जग के सब दुखियारे रस्ते मेरे हैं। मैं समस्त सुबहों-शामों में शामिल हूं, मैं जन-मन के संग्रामों में ...
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