शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 11 November 2014
प्रभाष जोशी की पांचवीं पुण्यतिथि पर स्मृति सभा
›
प्रभाष परम्परा न्यास और मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने वसुंधरा (गाजियाबाद) स्थित इंस्टीट्शंस के मेवाड़ ऑडिटोरियम में सुप्रसिद्ध पत्रकार द...
थके नहीं, तुम ऐसे क्यों हो / जयप्रकाश त्रिपाठी
›
मैंने जब-जब लिखना चाहा, कभी नहीं लिख पाया तुमको, मैंने जब-जब पढ़ना चाहा, कभी नहीं पढ़ पाया तुमको, तुम इतना क्यों ऐसे-ऐसे..... मैंने...
Monday, 10 November 2014
मैं इन रस्तों का मतवाला राही हूं/जयप्रकाश त्रिपाठी
›
खुशियों के ये सारे रस्ते मेरे हैं, जग के सब दुखियारे रस्ते मेरे हैं। मैं समस्त सुबहों-शामों में शामिल हूं, मैं जन-मन के संग्रामों में ...
कविवर तोंदूराम / हरिकृष्ण देवसरे
›
कविवर तोंदूराम बुझक्कड़ कभी-कभी आ जाते हैं। खड़ी निरंतर रहती चोटी, आँखें धँसी मिचमिची छोटी, नाक चायदानी की टोटी, अंग-अंग की छटा निराल...
एक पाठक / मक्सिम गोर्की
›
रात काफी हो गयी थी जब मैं उस घर से विदा हुआ जहाँ मित्रों की एक गोष्ठी में अपनी प्रकाशित कहानियों में से एक का मैंने अभी पाठ किया था । उन्...
अपनी चार पंक्तियां
›
जब थके आदमी को ढोता हूं सोचता हूं, उदास होता हूं वक्त थोड़ा सा गुदगुदाता है खूब हंसता हूं, खूब रोता हूं
पटकथा / धूमिल
›
जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; खून के अँधेर में दवा का...
‹
›
Home
View web version