शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Monday, 10 November 2014

मैं इन रस्तों का मतवाला राही हूं/जयप्रकाश त्रिपाठी

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खुशियों के ये सारे रस्ते मेरे हैं, जग के सब दुखियारे रस्ते मेरे हैं। मैं समस्त सुबहों-शामों में शामिल हूं, मैं जन-मन के संग्रामों में ...

कविवर तोंदूराम / हरिकृष्ण देवसरे

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कविवर तोंदूराम बुझक्कड़ कभी-कभी आ जाते हैं। खड़ी निरंतर रहती चोटी, आँखें धँसी मिचमिची छोटी, नाक चायदानी की टोटी, अंग-अंग की छटा निराल...

एक पाठक / मक्सिम गोर्की

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रात काफी हो गयी थी जब मैं उस घर से विदा हुआ जहाँ मित्रों की एक गोष्ठी में अपनी प्रकाशित कहानियों में से एक का मैंने अभी पाठ किया था । उन्...

अपनी चार पंक्तियां

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जब थके आदमी को ढोता हूं सोचता हूं, उदास होता हूं वक्त थोड़ा सा गुदगुदाता है खूब हंसता हूं, खूब रोता हूं

पटकथा / धूमिल

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जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; खून के अँधेर में दवा का...

कर्ज उतर जाता है एहसान नहीं उतरता /राही मासूम रजा

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यहाँ (बंबई में) कई दोस्त मिले जिनके साथ अच्छी-बुरी गुजरी। कृष्ण चंदर, भारती, कमलेश्वर, जो शुरू ही में ये न मिल गए होते तो बंबई में मेरा र...

मंडल ने सरदेसाई के जातिवादी ‘ट्वीट’ पर उठाया सवाल

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वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई की उत्साह से भरी एक ट्वीट उनके गले की फांस बनती जा रही है। मोदी सरकार के कैबिनेट एक्सपेंशन के बाद उन्ह...
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