शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Sunday, 9 November 2014
हमारी बात कौन लिखेगा / डॉ.आशीष वशिष्ठ
›
बच्चे देश का भविष्य हैं। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है। आजादी के साढे छह दशकों के बाद भी देश के करोड़ों बच्च...
मेरे रिमार्क 'हबीब ने थिएटर में वो काम किया जो रामायण में हनुमान ने किया था' को सर्वेश्वर ने दिनमान में छापा तो वो नाराज हो गए
›
इप्टा के अध्यक्ष रणबीर सिंह से दिनेश चौधरी की बातचीत थियेटर में आपकी भूमिका प्रमुखतः क्या है? अपने लिखे नाटकों और उनके निर्देशकों के ब...
भेड़िया, भेड़िया / सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
›
एक चरवाहा लड़का गाँव के जरा दूर पहाड़ी पर भेड़ें ले जाया करता था। उसने मजाक करने और गाँववालों पर चड्ढी गाँठने की सोची। दौड़ता हुआ गाँव के...
मातृभाषा/रसूल हमजातोव
›
सपनों में तो सदा अनोखी और अटपटी बातें होतीं आज अचानक मैंने अपने को सपने में मरते देखा दागिस्तानी घाटी थी, मैं था, औ' धूप झुलसती थ...
हम सब चोर हैं / यशपाल जैन
›
पुराने जमाने की बात है। एक आदमी को अपराध में पकड़ा गया। उसे राजा के सामने पेश किया गया। उन दिनों चोरो को फाँसी की सजा दी जाती थी। अपराध सिद...
Saturday, 8 November 2014
'द हिंदू' के खिलाफ हिंदूवादियों ने खोला मोर्चा
›
'The Hindu' अंग्रेजी अखबार इन दिनो हिंदूवादियों के निशाने पर है। इसकी वजह बताई गई है चार नबंबर को द हिंदू में छपी एक स्पेशल रिपोर...
Friday, 7 November 2014
भिखारी/तुर्गनेव
›
मैं एक सड़क के किनारे जा रहा था। एक बूढ़े जर्जर भिखारी ने मुझे रोका। लाल सुर्ख और आँसुओं में तैरती–सी आँखें, नीले होंठ,गंदे और गले हुए च...
‹
›
Home
View web version