शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Thursday, 6 November 2014
शिकार को निकला शेर / सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
›
एक शेर एक रोज जंगल में शिकार के लिए निकला। उसके साथ एक गधा और कुछ दूसरे जानवर थे। सब-के-सब यह मत ठहरा कि शिकार का बराबर हिस्सा लिया जाएग...
एक चोर की कहानी / श्रीलाल शुक्ल
›
माघ की रात। तालाब का किनारा। सूखता हुआ पानी। सड़ती हुई काई। कोहरे में सब कुछ ढँका हुआ। तालाब के किनारे बबूल, नीम, आम और जामुन के कई छोटे-...
मीडिया की साख से मत खेलिए / संतोष भारतीय
›
अब सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का कोई मतलब ही नहीं रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार अभियान ...
बिना टॉफी वाले बच्चे
›
ट्रिक ओर ट्रीट/घुघूती बासूती
›
परसों शाम अचानक घंटी बजी। देखा तो बच्चों का झुँड चेहरे पर थोड़ी सी कलाकारी कर हैलोवीन मनाता आया था। कई तरह की टॉफियाँ न जाने क्यों मेरे घर...
दिल्ली किससे लड़ेगी / रवीश कुमार
›
राजनीति मनमोहन देसाई की फ़िल्म की तरह जो फ्लैश बैक से शुरू होती है जिसमें दो लड़के अपने परिवेश के बंधनों को तोड़कर भागते हैं और पुल से च...
झू लिक्सुआन का ये चित्र क्या कहता है...
›
‹
›
Home
View web version