शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 4 November 2014
पत्रकारिता में जूते चाटने की नौबत / रवीश कुमार
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फिल्म पत्रकारिता तो अब जूते चाटने की नौबत तक पहुंच गई है। टीवी में फिल्म पत्रकारिता अब प्रमोशन है। इंटरव्यू से पहले तय होता है सवाल कैसे ...
अपराध और अपराधी / फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की
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'पूरी तरह यही मेरे कहने का मतलब नहीं था,' रस्कोलनिकोव ने सीधे ढंग से और विनम्रता के साथ कहना शुरू किया। 'मैं फिर भी मानता हू...
साहित्य और पत्रकारिता / गोविंद सिंह
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साहित्य और पत्रकारिता के बीच एक अटूट रिश्ता रहा है। एक ज़माना वह था जब इन दोनों को एक-दूसरे का पर्याय समझा जाता था। ज्यादातर पत्रकार साहित्य...
हिंदी पत्रकारिता के सामने चुनौतियों का पहाड़ / जितेन्द्र बच्चन
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हिंदी पत्रकारिता के 187 साल पूरे होने के बाद भी उसके सामने चुनौतियों का जो पहाड़ पहले खड़ा था, वह आज भी जस का तस है। भारत में आधुनिक ढंग की प...
पत्रकारिता और करियर / कमल शर्मा
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आईआईएमसी से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद 1988 में जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की थी तब बिजनेस जर्नलिज्म से जुड़ने का फैसला किया था। उस समय ...
हिंदी के लिए गूगल का नया मंच
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इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए गूगल ने एक ऐसा मंच तैयार किया है, जो हिंदी वेबसाइट्स का अड्डा होगा। इसके लिए गूगल ...
मोदी का अंग्रेजी प्रेम
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पीएम नरेंद्र मोदी तीन नवंबर को अंग्रेजी के दस बड़े अखबारों के संपादकों (टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिटर-इन-चीफ जयदीप बोस, हिन्दुस्तान टाइम्स के...
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