शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 8 October 2014
मां-चरित मानस
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घर के मौसम की तरह, बाजार के दिवसों की तरह, फिल्मी या किताबी किस्से-कहानियों की तरह या मन में जीवन में समायी हुई, समस्त स्मृतियों में नि...
जयप्रकाश त्रिपाठी
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जीवन असली, नकली जीवन, नकली बातें, जैसे अपनी आंख मूंद कर खुद से भाग रहे हों ऊबड़-खाबड़, कभी इधर की, कभी...
तेल देखिए और तेल की धार देखिए
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हरदम प्राइस-वार देखिए, ओपेक की हुंकार देखिए, तरह-तरह की कार देखिए, अद्भुत नाटककार देखिए, दिल्ली की सरकार देखिए, महंगाई की मार देखिए..... ...
ईटीवी के सीनियर एडिटर ब्रजेश मिश्रा ने दागे मृणाल पांडे पर सवाल
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साहित्यकार-पत्रकार मृणाल पांडे प्रसार भारती की चेयरपर्सन रह चुकी हैं, हिन्दुस्तान की संपादक के रूप में अपनी क्लिष्ट हिंदी के चलते भी उन्...
Tuesday, 7 October 2014
हम भी मार्क्सवादी और तुम भी / जयप्रकाश त्रिपाठी
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हंसते हंसते फांसी पर चढ़े थे वे शहीद और हम सब हंस हंस...
नस्ल,धर्म, जाति, दलित-स्त्री, समुदाय-सम्प्रदाय और देश के अलग-अलग खांचों में सर्वहारा को वर्गीकृत करने वाले मूलतः पूंजी के पोषक हैं
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रवीश को अंजुम की 'चिकोटी'..ट्विट ट्विट
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टीवी पत्रकार अजीत अंजुम और रवीश कुमार तकरीबन एक ही कद और उम्र के टीवी पत्रकार हैं, ये अलग बात है कि दोनों की फैन फॉलोइंस अलग-अलग किस्म क...
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