शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 7 October 2014
हम भी मार्क्सवादी और तुम भी / जयप्रकाश त्रिपाठी
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हंसते हंसते फांसी पर चढ़े थे वे शहीद और हम सब हंस हंस...
नस्ल,धर्म, जाति, दलित-स्त्री, समुदाय-सम्प्रदाय और देश के अलग-अलग खांचों में सर्वहारा को वर्गीकृत करने वाले मूलतः पूंजी के पोषक हैं
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रवीश को अंजुम की 'चिकोटी'..ट्विट ट्विट
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टीवी पत्रकार अजीत अंजुम और रवीश कुमार तकरीबन एक ही कद और उम्र के टीवी पत्रकार हैं, ये अलग बात है कि दोनों की फैन फॉलोइंस अलग-अलग किस्म क...
Sunday, 5 October 2014
वह अकल्पनीय क्षण / जयप्रकाश त्रिपाठी
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जब जीवन में कुछ अकल्पनीय होता है, विश्वास कर पाना भी असहज हो जाता है। मुझे पिछले तीन-चार दिनो में अचंभित करने वाले ऐसे कई-एक अनुभव मिले। अच...
Saturday, 4 October 2014
हादसा और प्यार
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अपनी मुश्किल घड़ी में मित्र परिवार के शब्दों से अपेक्षाधिक संबल मिला, जिनसे इस मंच पर आज तक कभी संवाद न हो सका था, उनसे भी आश्वास्त हो ले...
Tuesday, 30 September 2014
अधिकारियों की सरपरस्ती में रूस विरोधी सिरफिरो ने यूक्रेन के खारकीव शहर में तोड़ दी 50 साल पुरानी व्लादमिर ईल्यिच लेनिन की प्रतिमा। 28 फीट ऊंची प्रतिमा को विद्रोहियों ने एक घंटे में गिराया । वे प्रतिमा के टुकड़े अपने साथ ले गए।
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Monday, 29 September 2014
सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को/यशवंत सिंह
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जी न्यूज पर पत्रकारिता की रक्षा के बहाने हाथापाई प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजदीप सरदेसाई को घंटे भर तक पाठ पढ़ाते सुधीर चौधरी को देख यही मु...
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