शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Saturday, 20 September 2014
राजस्थान पत्रिका 21 सितंबर 2014 : मीडिया हूं मैं
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http://epaper.patrika.com/342276/Jodhpur-Rajasthan-Patrika/21-09-2014#page/24/2
बेर्टोल्ट ब्रेष्ट
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सभी देशों की मेहनतकश जनता के हित में, लेखकों को एक लड़ाकू यथार्थवाद को अपनाने के लिए ललकारा जाना चाहिए। केवल एक समझौताविहीन यथार्थवाद, जो ...
पाब्लो नेरूदा
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जो किताबें आपको सोचने के लिए जितना ही ज़्यादा मजबूर करती हैं, वे आपके लिए उतनी ही ज़्यादा मददगार साबित होती हैं । सीखने का सबसे मुश्किल ...
कार्ल सैगन
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किताब कितनी अनोखी चीज़ है। यह पेड़ से बनी और लचीले हिस्सों वाली एक सपाट सी वस्तु है जिस पर रेंगने से बनी गहरी रेखाओं की तरह कुछ अजीबोगरी...
कवि बेलिंस्की
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हमारे युग की कला क्या है? न्याय की घोषणा, समाज का विश्लेषण, परिमाणत: आलोचना। विचारतत्व अब कलातत्व तक में समा गया है। यदि कोई कलाकृत...
मुक्तिबोध
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तो फिर जनता का साहित्य क्या है? जनता के साहित्य से अर्थ है ऐसा साहित्य जो जनता के जीवनादर्शों को, प्रतिष्ठापित करता हो, उसे अपने मु...
पॉल रोबसन
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प्रत्येक कलाकार, प्रत्येक वैज्ञानिक, प्रत्येक लेखक को अब यह तय करना होगा कि वह कहां खड़ा है। संघर्ष से ऊपर, ओलम्पियन ऊंचाइयों पर खड़ा ह...
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