शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 16 September 2014

लघुपत्रिका के सम्पादक / महाभूत चन्दन राय

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वह जो बने बैठे साहित्य के कुलदेवता परिचय-निष्ठ, आत्म-निष्ठ, आत्मकेंद्रित साहित्य के द्रोण आप जब भी लिखेंगे कविता में नीम-चढ़े यथार्थ वो ...

यह कविता हमारे पीले फफोलों का कर्सद-गीत है / महाभूत चन्दन राय

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हम जादूगोड़िया आदिवासी हैं, जादूगोड़ा की जादुई मिट्टी के जादूगर अपने ही देश में जलावतनी, हम जल रहे हैं रोटी-रोजगार-यूरेनियम में ! तुम्हार...
Sunday, 14 September 2014

मुक्तिबोध 'एक गोत्रहीन कवि' / अशोक वाजपेयी

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मुक्तिबोध गोत्रहीन कवि हैं. हिन्दी में उनका कोई पूर्वज नहीं खोजा जा सकता. असल में उनके पूर्वज तोल्सतोय, दोस्तोवस्की, गोर्की इत्यादि रूसी...
Saturday, 13 September 2014

जन्नत में आंसुओं का सैलाब, फिर से हालात और गंभीर होने के संकेत

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जन्नत में आंसुओं का सैलाब, फिर से हालात और गंभीर होने के संकेत

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जन्नत में आंसुओं का सैलाब, फिर से हालात और गंभीर होने के संकेत

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जन्नत में आंसुओं का सैलाब, फिर से हालात और गंभीर होने के संकेत

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