शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Sunday, 7 September 2014

शैलप्रिया स्मृति न्यास की ओर से द्वितीय शैलप्रिया स्मृति सम्मान सुख्यात लेखिका नीलेश रघुवंशी को देने की घोषणा की गई है। नीलेश रघुवंशी को यह सम्मान 14 दिसंबर 2014 को रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा। नब्बे के दशक में अपनी कविताओं से हिंदी के युवा लेखन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली कवयित्री नीलेश रघुवंशी की रचना यात्रा पिछले दो दशकों में काफी विपुल और बहुमुखी रही है।

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पुजारी ने दी पत्रकार की सुपारी

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हाल ही में फिल्म हैप्पी न्यू ईयर की स्टार कास्ट में से कई लोगों को धमकी भरे फोन और शाहरुख के करीबी प्रोडयूसर और ईवेंट मैनेजर करीम मोरानी ...

जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. लगभग 150 और लोगों की मौत हो चुकी है.

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क्या हड़प्पा की लिपियाँ पढ़ी जा सकती हैं?

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हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले बर्तन समेत अन्य वस्तुओं पर सिंधु घाटी सभ्यता की अंकित चित्रलिपियों को पढ़ने की कोशिशें लगातार जारी ह...

पृथ्वी पर लेटना / आत्मरंजन

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पृथ्वी पर लेटना, पृथ्वी को भेंटना भी है  ठीक वैसे जैसे थकी हुई हो देह पीड़ा से पस्त हो रीढ़ की हड्डी सुस्ताने की राहत में गैंती-बेलचे के आस...

अंधेरे में / मुक्तिबोध

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दुर्लभ चित्र में अपनी पत्नी शांता के साथ गजानन माधव मुक्तिबोध (बुधवार 11 सितंबर 2014 को है मुक्तिबोध की पचासवीं पुण्यतिथि)। प्रस्तुत है म...

लोकतंत्र में ईश्वर / राकेश रोहित

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एक आदमी चूहे की तरह दौड़ता था अन्न का एक दाना मुँह में भर लेने को विकल। एक आदमी केकड़े की तरह खींच रहा था अपने जैसे दूसरे की टाँग। एक...
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