शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Friday, 5 September 2014
नागार्जुन
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ॐ शब्द ही ब्रह्म है.. ॐ शब्द्, और शब्द, और शब्द, और शब्द ॐ प्रणव, ॐ नाद, ॐ मुद्रायें ॐ वक्तव्य, ॐ उदगार्, ॐ घोषणाएं ॐ भाषण...
आदरबाज़ी / स्वयं प्रकाश
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- हमें तो आप माफ ही करो भैया! - क्यों अंकल? क्या हो गया? आपको प्रॉपर रिगार्ड नहीं मिला क्या? - उल्टी बात है भैया। जरा ज्यादा और जल्दी ह...
अक्खी मुंबई / राकेश श्रीमाल
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एक और धीरूभाई, जो मुंबई में रहता है शहरों के उपन्यास शहर के प्रतिनायकत्व से जूझते हुए शुरू होते हैं. मध्यवर्ग की आकांक्षा और सीमा के बीच...
दहर को दहर का अफ़साना बना रखा था
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आकि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ से जिसने इस दिल को परी ख़ाना बना रखा था जिस की उल्फ़त में भुला रखी थी दुनिया हमने दहर को दहर का अफ...
आलोचना को ईमान, साहस और धीरज की जरूरत है/गणेश पाण्डेय
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आलोचना का प्राण है रचना. जैसे कोई प्राण के बिना जीवित नहीं रह सकता, ठीक उसी तरह रचना के बिना आलोचना का जीवन नहीं है. खबरदार, मेरा यह आशय कत...
ऐश्वर्य की मियाद/पल्लव
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'आखिर ईश्वर है क्या ? मनुष्य के श्रेष्ठतम का प्रकाश ही तो? और यह प्रकाश प्रत्येक मनुष्य के भीतर होता है. लेकिन फूटता तभी है जब किसी क...
Tuesday, 2 September 2014
ओम थानवी जी का दर्द / अवधेश कुमार
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'' ... मैं ओम थानवी जी की पोस्ट पढ़ता हूं, पर उस पर टिप्पणियां कभी-कभार करता हूं। जब वे साहित्य, कला, संस्कृति, सिनेमा, समाज आदि पर ...
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