शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Thursday, 21 August 2014

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हम गोरी बुराई की जगह काली बुराई को लाकर कष्‍ट नहीं उठाना चाहते। बुराइयां, एक स्‍वार्थी समूह की तरह, एक-दूसरे का स्‍थान लेने के लिए तैया...

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प्यासे-प्यासे ओस चाटते रहे फलाने, बिना सजा के जेल काटते रहे फलाने, समय कटे कैसे अब एक-एक दिन भारी, जीवन भर आदर्श बांटते रहे फलाने । ...
Wednesday, 20 August 2014

मीडिया हूं मैं / जयप्रकाश त्रिपाठी

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मीडिया में अपना भविष्य देख रहे जर्नलिज्म के छात्रों के लिए अपरिहार्य-सी मेरी सद्यःप्रकाशित पुस्तक 'मीडिया हूं मैं' 'पत्रकारित...

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Saturday, 16 August 2014

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लेखकों और कवियों के काम की एक अदभुत बहस / सच और झूठ एक-दूसरे के साथ-साथ / साहस यह नहीं पूछता कि चट्टान कितनी ऊँची है... ( मेरा दागिस्...
Friday, 8 August 2014

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मैं नास्तिक क्यों हूँ? : भगतसिंह यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्र...
Wednesday, 19 March 2014

ज्यों माँ मुस्कुराया करती थी / रति सक्सेना

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वह मुस्काई मैं उसके लिए उपमाएँ ढूंढ़ने लगी खिली धूप, लिली का फूल चमकती चांदनी... सभी उपमाएँ बासी लगतीं हैं मुझे सोचा कुछ नई उपमाएँ खोज...
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