शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Wednesday, 20 August 2014

मीडिया हूं मैं / जयप्रकाश त्रिपाठी

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मीडिया में अपना भविष्य देख रहे जर्नलिज्म के छात्रों के लिए अपरिहार्य-सी मेरी सद्यःप्रकाशित पुस्तक 'मीडिया हूं मैं' 'पत्रकारित...

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Saturday, 16 August 2014

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लेखकों और कवियों के काम की एक अदभुत बहस / सच और झूठ एक-दूसरे के साथ-साथ / साहस यह नहीं पूछता कि चट्टान कितनी ऊँची है... ( मेरा दागिस्...
Friday, 8 August 2014

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मैं नास्तिक क्यों हूँ? : भगतसिंह यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्र...
Wednesday, 19 March 2014

ज्यों माँ मुस्कुराया करती थी / रति सक्सेना

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वह मुस्काई मैं उसके लिए उपमाएँ ढूंढ़ने लगी खिली धूप, लिली का फूल चमकती चांदनी... सभी उपमाएँ बासी लगतीं हैं मुझे सोचा कुछ नई उपमाएँ खोज...

धूमिल की अन्तिम कविता / धूमिल

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शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो अक्षरों के बीच गिरे हुए आदमी को पढ़ो क्या तुमने सुना कि यह लोहे की आवाज़ है या मिट्टी में गिरे ...

अधिनायक वंदना / गोरख पाण्डेय

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जन गण मन अधिनायक जय हे  ! जय हे हरित क्रांति निर्माता जय गेहूँ हथियार प्रदाता जय हे भारत भाग्य विधाता अंग्रेज़ी के गायक जय हे ! जन......
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