शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Friday, 8 August 2014

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मैं नास्तिक क्यों हूँ? : भगतसिंह यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्र...
Wednesday, 19 March 2014

ज्यों माँ मुस्कुराया करती थी / रति सक्सेना

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वह मुस्काई मैं उसके लिए उपमाएँ ढूंढ़ने लगी खिली धूप, लिली का फूल चमकती चांदनी... सभी उपमाएँ बासी लगतीं हैं मुझे सोचा कुछ नई उपमाएँ खोज...

धूमिल की अन्तिम कविता / धूमिल

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शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो अक्षरों के बीच गिरे हुए आदमी को पढ़ो क्या तुमने सुना कि यह लोहे की आवाज़ है या मिट्टी में गिरे ...

अधिनायक वंदना / गोरख पाण्डेय

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जन गण मन अधिनायक जय हे  ! जय हे हरित क्रांति निर्माता जय गेहूँ हथियार प्रदाता जय हे भारत भाग्य विधाता अंग्रेज़ी के गायक जय हे ! जन......

मुक्ति की आकांक्षा / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

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चिड़िया को लाख समझाओ कि पिंजड़े के बाहर धरती बहुत बड़ी है, निर्मम है, वहॉं हवा में उन्‍हें अपने जिस्‍म की गंध तक नहीं मिलेगी। यूँ तो ब...

मंत्र...ॐ श‌ब्द ही ब्रह्म है.. ॐ श‌ब्द्, और श‌ब्द / नागार्जुन

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ॐ श‌ब्द ही ब्रह्म है.. ॐ श‌ब्द्, और श‌ब्द, और श‌ब्द, और श‌ब्द ॐ प्रण‌व‌, ॐ नाद, ॐ मुद्रायें, ॐ व‌क्तव्य‌, ॐ उद‌गार्, ॐ घोष‌णाएं ॐ भाष‌ण‌....

हँसो हँसो जल्दी हँसो / रघुवीर सहाय

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हँसो हँसो जल्दी हँसो हँसो, तुम पर निगाह रखी जा रही है हँसो, अपने पर न हँसना क्योंकि उसकी कड़वाहट पकड़ ली जाएगी और तुम मारे जाओगे ऐसे ...
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