शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 22 February 2014

चचा बनारसी

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वैद हकीम मुनीम महाजन साधु पुरोहित पंडित पोंगा, लेखक लाख मरे बिनु अन्न, चचा कविता करि का सुख भोगा। पाप को पुण्य भलो की बुरो, सुरलोक की रौर...

धूमिल

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हर तरफ धुआँ है, हर तरफ कुहासा है जो दांतों और दलदलों का दलाल है वही देशभक्त है। अंधकार में सुरक्षित होने का नाम है-तटस्थता। यहां कायरता...
Sunday, 16 February 2014

कैलाश गौतम / बड़की भौजी

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जब देखो तब बड़की भौजी हँसती रहती है हँसती रहती है कामों में फँसती रहती है। झरझर झरझर हँसी होंठ पर झरती रहती है घर का खाली कोना भौजी भरती...
Saturday, 15 February 2014

जय प्रकाश त्रिपाठी

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ठसाठस, इतनी भीड़भाड़, बाहर मेला लगा था, लुटता रहा मैं और कितना अजनबी हो गया मेरे अंदर का चेहरा। तेजाब-सी लबालब दर्द की शीशी जैसे न क...

नोम चॉम्स्की

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जहाँ तक मानव स्वतन्त्रता का प्रश्न है, यदि आप यह कल्पना कर बैठते हैं कि इसकी कोई आशा नही है तो इसका अर्थ हुआ कि आप यह आशवासन दे रहे हैं क...

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असहमति और प्रतिरोध केवल सरकार के समर्थकों के लिए आज़ादी, केवल एक पार्टी के सदस्यों के लिए आज़ादी - चाहे वो संख्या में कितने ही क्यों न ...

गुरूद्वारे की बेटी ..... / इमरोज़

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मेरे बापू गुरूद्वारे के पाठी हैं जब मैं पूछने योग्य हुई बापू से पूछा , बापू लोग मुझे गुरूद्वारे की बेटी क्यों कहते हैं ....? पुत्तर मैं...
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