शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Saturday, 15 February 2014
जय प्रकाश त्रिपाठी
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ठसाठस, इतनी भीड़भाड़, बाहर मेला लगा था, लुटता रहा मैं और कितना अजनबी हो गया मेरे अंदर का चेहरा। तेजाब-सी लबालब दर्द की शीशी जैसे न क...
नोम चॉम्स्की
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जहाँ तक मानव स्वतन्त्रता का प्रश्न है, यदि आप यह कल्पना कर बैठते हैं कि इसकी कोई आशा नही है तो इसका अर्थ हुआ कि आप यह आशवासन दे रहे हैं क...
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असहमति और प्रतिरोध केवल सरकार के समर्थकों के लिए आज़ादी, केवल एक पार्टी के सदस्यों के लिए आज़ादी - चाहे वो संख्या में कितने ही क्यों न ...
गुरूद्वारे की बेटी ..... / इमरोज़
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मेरे बापू गुरूद्वारे के पाठी हैं जब मैं पूछने योग्य हुई बापू से पूछा , बापू लोग मुझे गुरूद्वारे की बेटी क्यों कहते हैं ....? पुत्तर मैं...
सपने / पाश
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हर किसी को नहीं आते बेजान बारूद के कणों में सोई आग के सपने नहीं आते बदी के लिए उठी हुई हथेली को पसीने नहीं आते शेल्फ़ों में पड़े इत...
तुम्हारी बातों से / बर्णाली भराली
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तुम्हारी बातों की सीढी चढ़ते हमको मिला शब्दों का इक गाँव आसमान की चिड़िया खेत की गाय-बकरी तलब के कछुए और मछली और हमारे घर के पिछवाड़े...
- लीना टिब्बी
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काश ऐसा होता कि ईश्वर मेरे बिस्तर के पास रखे पानी भरे गिलास के अन्दर से बैंगनी प्रकाश पुंज-सा अचानक प्रकट हो जाता। काश ऐसा होता कि ईश्वर श...
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