शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Saturday, 15 February 2014
मदन कश्यप
›
बड़ी हो रही है बेटी बड़ा हो रहा है उसका एकांत वह चाहती है अब भी चिड़ियों से बतियाना फूलों से उलझना पेड़ों से पीठ टिका कर सुस्ताना ...
जयप्रकाश त्रिपाठी
›
आग बटोरे चांदनी, नदी बटोरे धूप। हवा फागुनी बांध कर रात बटोरे रूप। पुड़िया बंधी अबीर की मौसम गया टटोल। पोर-पोर पढ़ने लगे मन की पाती खोल...
खोज खबरिया लेत रहीं भोजपुरिया धुन में
›
एही कहल जाला आंख एक्को ना, कजरौटा बारह ठो। आ तनी आउर मुंहफटई से कहीं त झोरी में बाल नहीं (बाल ऊ वाला), औ चले जगन्नाथ जी। सरमायेदारन की सेव...
हे बिलाग वाले बाबू काहे एतना नाराज हउवा
›
न एक्को टिप्पन्नी-सिप्पनी, न कौनो ताक-झांक आखिर एतना नाराजी क कौनो तो वजह होई हम त रउवा लोगन के साथ कौनो एइसन गलती-सलती भी ना कइले बानीं...
ई बात चंडूखाने क हउवै का?
›
तीन-चार साल से भोजपुरी का नांव खूब उजियार होत ह। अइसर उजियार कि अन्हारो क सिर सरम से गड़ि जाय। त आपो सबन जानल चाहब कि ऊ कवन लोग हउवैं, जे ...
सावधान संसद है बहस चल रही है
›
संसद में बहस चल रही है कि देश जल रहा है सावधान संसद है बहस चल रही है बहस चल रही है कि देश जल रहा है, कश्मीर जल रहा है, आसाम जल रहा है...
एक फ़िलिस्तीनी घाव की डायरी / महमूद दरवेश
›
हमें याद दिलाने की ज़रूरत नहीं कि माउन्ट कारमेल[2] हमारे भीतर है और गैलिली[3] की घास हमारी पलकों पर । ये मत कहना : अगर हम दौड़ पड़ते उ...
‹
›
Home
View web version