शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 15 February 2014

हे बिलाग वाले बाबू काहे एतना नाराज हउवा

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न एक्को टिप्पन्नी-सिप्पनी, न कौनो ताक-झांक आखिर एतना नाराजी क कौनो तो वजह होई हम त रउवा लोगन के साथ कौनो एइसन गलती-सलती भी ना कइले बानीं...

ई बात चंडूखाने क हउवै का?

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तीन-चार साल से भोजपुरी का नांव खूब उजियार होत ह। अइसर उजियार कि अन्हारो क सिर सरम से गड़ि जाय। त आपो सबन जानल चाहब कि ऊ कवन लोग हउवैं, जे ...

सावधान संसद है बहस चल रही है

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संसद में बहस चल रही है कि देश जल रहा है सावधान संसद है बहस चल रही है बहस चल रही है कि देश जल रहा है, कश्मीर जल रहा है, आसाम जल रहा है...

एक फ़िलिस्तीनी घाव की डायरी / महमूद दरवेश

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हमें याद दिलाने की ज़रूरत नहीं कि माउन्ट कारमेल[2] हमारे भीतर है और गैलिली[3] की घास हमारी पलकों पर । ये मत कहना : अगर हम दौड़ पड़ते उ...

बहुत बोलता हूँ मैं / महमूद दरवेश

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बहुत बोलता हूँ मैं स्त्रियों और वृक्षों के बीच के सूक्ष्म भेदों के बारे में धरती के सम्मोहन के बारे में और ऐसे देश के बारे में नहीं ह...

आओ बैठें फ़ुटपाथ पर ही / निलिम कुमार

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इस जन-अरण्य में कहाँ बैठें बताओ सुनसान कहीं नहीं है पार्क में बैठ नहीं सकते पानी के फव्वारे को देखकर और खिले हुए फूल -- हमारी नज़रें...

बचपन / निलिम कुमार

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चींटियों से बाँबी और उसके क़रीब बाँसों के कुटुम्ब बड़ी उम्र के नर, मोहक मादा और, उनकी झालरें थामते हुए शिशु हम उनके क़रीब खेला करते, ...
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