शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 8 February 2014

जयप्रकाश त्रिपाठी

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उड़ गई तीनो एक-एक कर पतंगें चली गई हों जैसे अपने अपने हिस्से के आकाशों की ओर। क्षितिज के इस पार रह गया था मैं, और कटी डोर जैसी मां...

दिविक रमेश

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बेटी ब्याही गई है, गंगा नहा लिए हैं माता-पिता पिता आश्वस्त हैं स्वर्ग के लिये कमाया हॆ कन्यादान का पुण्य। और बेटी? पिता निहार रहे हैं,...

जयप्रकाश त्रिपाठी

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अर्थ है या शब्द से प्रतिघात है, भावनाओं पर कुठाराघात है, क्या पता, किस हाल में जज्बात हैं, आपके भी मन में कोई बात है।

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आपकी हर सांस मैंने पढ़ लिया, मंत्र-सा विश्वास मैंने पढ़ लिया, रह गया कोई न मौसम अनपढ़ा शब्दशः मधुमास मैंने पढ़ लिया।
Thursday, 6 February 2014

काकी की कहावतें........

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अपना हाथ, जगन्नाथः सौ सुनार की, एक लोहार कीः नाच न जाने आंगन टेढ़ः छछनी छछन्न करे, टाटी-बेड़ा बन्न करेः आंख एक नहीं, कजरौटा बारहः मरे...
2 comments:
Wednesday, 5 February 2014

उदयप्रकाश

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प्यार कहता है अपनी भर्राई हुई आवाज़ में भविष्य और मैं देखता हूं उसे सांत्वना की हंसी के साथ हंसी जिसकी आंख से रिसता है आंसू और शरीर के ...

अग्निशेखर

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इन दिनों मेरी बिटिया निहारती है कैम्प में चिड़ियों को सुनती है धूप में उनकी बातें और देर तक रहती है गुम सामने-सामने। उड़ जाती हैं टैंट...
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