शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 4 February 2014

शंभुनाथ सिंह

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सोन हँसी हँसते हैं लोग हँस-हँस कर डसते हैं लोग। रस की धारा झरती है विष पिए हुए अधरों से, बिंध जाती भोली आँखें विषकन्या-सी नज़रों से। ...

मसखरे : उदयप्रकाश

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मसखरे एक दूसरे के प्रति बहुत गम्भीर होते हैं। मसखरे जो होते हैं, उन्हें लोग मसखरा ही कहते हैं लेकिन मसखरों के नाम भी होते हैं और वे आ...
Monday, 3 February 2014

नज़ीर अकबराबादी

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जब-जब आये वसंत, क्यों न याद आयें नज़ीर अकबराबादी..... आलम में जब बहार की आकर लगंत हो, दिल को नहीं लगन हो मजे की लगंत हो, महबूब दिलबर...

उमाशंकर तिवारी

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जो हवा में है, लहर में है क्यों नहीं वह बात मुझमें है? शाम कंधों पर लिए अपने ज़िन्दगी के रू-ब-रू चलना रोशनी का हमसफ़र होना उम्र की कन्...

श्रीकृष्ण तिवारी

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मीठी लगने लगी नीम की पत्ती -पत्ती लगता है यह दौर सांप का डसा हुआ है मुर्दा टीलों से लेकर जिन्दा बस्ती तक ज़ख्मी अहसासों की एक नदी बह...

श्रीकृष्ण तिवारी

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भीलों ने बाँट लिए वन, राजा को खबर तक नहीं। पाप ने लिया नया जनम, दूध की नदी हुई जहर गाँव, नगर धूप की तरह फैल गई यह नई ख़बर रानी हो गई बदच...
Sunday, 2 February 2014

एक मिनट का मौन

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एम्मानुएल ओर्तीज की विश्व प्रसिद्ध रचना इससे पहले कि मैं यह कविता पढ़ना शुरू करूँ मेरी गुज़ारिश है कि हम सब एक मिनट का मौन रखें ग्यारह ...
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