शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 28 January 2014

स्त्री की आजादी का प्रश्न और यह बर्बर समय

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कविता कृष्णन महिलाएं जब आजादी की बात करती हैं तो कुछ लोग तुरंत उसे उच्छृंखलता क्यों सुन लेते हैं! महिलाओं की आजादी और उच्छृंखलता इन दोनो...

महादेवी वर्मा

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मैं नीर भरी दुःख की बदली ! स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रंदन में आहत विश्व हँसा, नयनो में दीपक से जलते, पलकों में निर्झनी मचली ! म...

अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

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उठो लाल अब आँखें खोलो पानी लायी हूँ, मुँह धोलो बीती रात कमल -दल फूले उनके ऊपर भँवरे झूले चिडिया चहक उठी पेडो पर बहने लगी हवा अति स...

कोशिश करने वालों कभी हार नहीं होती : हर‌िवंश राय बच्चन

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कोशिश करने वालों की हार नहीं होती लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है ...

समय की शिला पर : डॉ.शम्भुनाथ सिंह

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समय की शिला पर मधुर चित्र कितने किसी ने बनाये, किसी ने मिटाये। किसी ने लिखी आँसुओं से कहानी किसी ने पढ़ा किन्तु दो बूंद पानी इसी में ...
Saturday, 25 January 2014

अली सरदार जाफरी

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कौन आज़ाद हुआ ? किसके माथे से सियाही छुटी ? मेरे सीने मे दर्द है महकुमी का मादरे हिंद के चेहरे पे उदासी है वही कौन आज़ाद हुआ ? खंजर आज़...

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बलिदान से पहले 22 मार्च 1931 को लिखा गया देशवासियों को अंतिम पत्र के मुख्य अंश " स्वाभाविक है ..जीने की इक्षा मुझमे भी होनी चाहिए , म...
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