शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 25 January 2014

अली सरदार जाफरी

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कौन आज़ाद हुआ ? किसके माथे से सियाही छुटी ? मेरे सीने मे दर्द है महकुमी का मादरे हिंद के चेहरे पे उदासी है वही कौन आज़ाद हुआ ? खंजर आज़...

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बलिदान से पहले 22 मार्च 1931 को लिखा गया देशवासियों को अंतिम पत्र के मुख्य अंश " स्वाभाविक है ..जीने की इक्षा मुझमे भी होनी चाहिए , म...
Friday, 24 January 2014

सांप

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एक मालदार जाट मर गया तो उसकी घरवाली कई दिन तक रोती रही। जात-बिरादरी वालों ने समझाया तो वह रोते-रोते ही कहने लगी, 'पति के पीछे मरने से त...

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सोच रहा हूँ सोचना बंद कर दूँ और सुखी रहूँ ! -रामकुमार कृषक ---- ‘क‘ से काम कर, ‘ख‘ से खा मत, ‘ग‘ से गीत सुना ‘घ‘ से घर की बात न करन...

हम फोकटिया मतदाता

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जयप्रकाश त्रिपाठी आज मतदाताओं के जागरूक होने का दिन है। जागरूक होते होते हम कहां से कहां पहुंच गये। जो हमे जागरूक करने आते हैं, हमारे लिए...
Tuesday, 21 January 2014

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

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उठ मेरी बेटी सुबह हो गई पेड़ों के झुनझुने बजने लगे; लुढ़कती आ रही है सूरज की लाल गेंद। उठ मेरी बेटी सुबह हो गई। तूने जो छोड़े थे, गै...
3 comments:

ओंकार

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चिड़िया, जब तुम आसमान में उड़ती हो, तुम्हारे मन में क्या चल रहा होता है? तुम मस्ती में उड़ी चली जाती हो, या कि सोचती हो, कहीं बादलों में...
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