शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Friday, 24 January 2014
सांप
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एक मालदार जाट मर गया तो उसकी घरवाली कई दिन तक रोती रही। जात-बिरादरी वालों ने समझाया तो वह रोते-रोते ही कहने लगी, 'पति के पीछे मरने से त...
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सोच रहा हूँ सोचना बंद कर दूँ और सुखी रहूँ ! -रामकुमार कृषक ---- ‘क‘ से काम कर, ‘ख‘ से खा मत, ‘ग‘ से गीत सुना ‘घ‘ से घर की बात न करन...
हम फोकटिया मतदाता
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जयप्रकाश त्रिपाठी आज मतदाताओं के जागरूक होने का दिन है। जागरूक होते होते हम कहां से कहां पहुंच गये। जो हमे जागरूक करने आते हैं, हमारे लिए...
Tuesday, 21 January 2014
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
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उठ मेरी बेटी सुबह हो गई पेड़ों के झुनझुने बजने लगे; लुढ़कती आ रही है सूरज की लाल गेंद। उठ मेरी बेटी सुबह हो गई। तूने जो छोड़े थे, गै...
3 comments:
ओंकार
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चिड़िया, जब तुम आसमान में उड़ती हो, तुम्हारे मन में क्या चल रहा होता है? तुम मस्ती में उड़ी चली जाती हो, या कि सोचती हो, कहीं बादलों में...
Sunday, 19 January 2014
कोई हाथ भी न मिलायेगा जो गले मिलोगे तपाक से....
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'जो हवा में है, लहर में है, क्यों नहीं वह बात मुझमें है'... इस दर्द को कैसे बांटूं। उन पर यहां लिख भी नहीं सकता और उनको आज शाम जान ...
उन्होंने कहा था
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'मुनि लोग तो स्वामी बन के अपनी ही मुक्ति के लिए एकांतवास करते हैं। लेकिन, मैं ऐसा हर्गिज नहीं कर सकता। सभी दु:खियों को छोड़ मुझे सिर्फ...
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