शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 21 January 2014
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
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उठ मेरी बेटी सुबह हो गई पेड़ों के झुनझुने बजने लगे; लुढ़कती आ रही है सूरज की लाल गेंद। उठ मेरी बेटी सुबह हो गई। तूने जो छोड़े थे, गै...
3 comments:
ओंकार
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चिड़िया, जब तुम आसमान में उड़ती हो, तुम्हारे मन में क्या चल रहा होता है? तुम मस्ती में उड़ी चली जाती हो, या कि सोचती हो, कहीं बादलों में...
Sunday, 19 January 2014
कोई हाथ भी न मिलायेगा जो गले मिलोगे तपाक से....
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'जो हवा में है, लहर में है, क्यों नहीं वह बात मुझमें है'... इस दर्द को कैसे बांटूं। उन पर यहां लिख भी नहीं सकता और उनको आज शाम जान ...
उन्होंने कहा था
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'मुनि लोग तो स्वामी बन के अपनी ही मुक्ति के लिए एकांतवास करते हैं। लेकिन, मैं ऐसा हर्गिज नहीं कर सकता। सभी दु:खियों को छोड़ मुझे सिर्फ...
राघवेंद्र प्रताप सिंह
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एक हँसी बाज़ारू साँस लिए भाड़े की, रामदीन सोच रहा अगले पखवाड़े की। 1. हिस्से में अपने चिरौरी है, विनती है रोटी एकाध मगर बार बार...
चंद्रभाल सुकुमार
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आपका कानून जंगल आपका हर तरफ स्वागत-सुमंगल आपका। द्रोपदी-सा देश नंगा हो रहा सिर्फ संसद के लिए दल आपका।
जयप्रकाश त्रिपाठी
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जय हो फेसबुक महराज की! जब अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय चुराकर फेसबुक की दुनिया में, अपने जीवंत-जागरूक दोस्तों की इस दुनिया में दाखिल होत...
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