शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 4 January 2014

छछनी छछन्न करे, टाटी-बेड़ा बन्न करे

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काकी की कहावत-1 जब हम कोई सही बात कहते हैं, उसका भी एक गलत पक्ष होता है (सोचने वालो के लिए)। 'पुरुष-अर्थी' समाज में 'तिरिया...
Tuesday, 31 December 2013

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आओ जी, स्वागत है

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जाओ जी, अब फिर न मिलेंगे
Sunday, 29 December 2013

नया साल

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हरिशंकर परसाई साधो, बीता साल गुजर गया और नया साल शुरू हो गया। नए साल के शुरू में शुभकामना देने की परंपरा है। मैं तुम्हें शुभकामना देने ...
Saturday, 21 December 2013

नया साल

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अमृत राय कहने की जरूरत नहीं। नया साल मुबारक, पुराने का मुँह काला। यही दुनिया का कायदा है। और कैसे न हो। जरा मिलाकर देखो दोनों को। यह दे...
Wednesday, 18 December 2013

कोई एक घर टूटने के बहाने......

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जयप्रकाश त्रिपाठी बशीर बद्र को सुन रहा था कि 'लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में'। बस, ये ही पांच-सात शब्द मन में अटक गए। आगे की ...
Sunday, 15 December 2013

अन्ना, 'आप' और लोकपाल का सच

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जयप्रकाश त्रिपाठी अन्ना के संतुष्ट होने-न-होने से सरकारी लोकपाल की सच्चाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता.... याद करिए तीन साल पहले रामलीला मै...
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