शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Wednesday, 18 December 2013
कोई एक घर टूटने के बहाने......
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जयप्रकाश त्रिपाठी बशीर बद्र को सुन रहा था कि 'लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में'। बस, ये ही पांच-सात शब्द मन में अटक गए। आगे की ...
Sunday, 15 December 2013
अन्ना, 'आप' और लोकपाल का सच
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जयप्रकाश त्रिपाठी अन्ना के संतुष्ट होने-न-होने से सरकारी लोकपाल की सच्चाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता.... याद करिए तीन साल पहले रामलीला मै...
Tuesday, 10 December 2013
चच्चू की चुन्नी
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अब का तुक्का-पुक्का फाड़ो पढ़ो पहाड़ा भाईजी। चुनाव चुक्का-मुक्का, लिक्खो नया पहाड़ा भाईजी। दिल्ली दांत निपोरे टुकटुक जो जीते, सबके जी...
ढोड़वा के घर में ढिंढोड़
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कोई गद्दी गया छोड़ है, भीतर-भीतर लगी होड़ है, जोड़-तोड़ भइ जोड़-तोड़ है। चित्तू चित्त पड़े पयताने, हांफ रहे बेवजह फलाने, दाद-खाज में ...
Sunday, 8 December 2013
आम आदमी की पार्टी का ताजा चैलेंज.......
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यह दिल्ली में सिर्फ पारंपरिक सरकार बना लेने भर का नहीं, देश की जनता के लिए नई राजनीतिक संभावनाओं का द्वार खुलने का समय है। जेपी मूवमें...
Saturday, 7 December 2013
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गीत-फरोश भवानीप्रसाद मिश्र जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ, मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ, मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ ! जी, ...
Friday, 6 December 2013
मैं स्त्री हूं, मुझे संभाल कर रखिए : किरण सिंह
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की लेखिका किरण सिंह की कई रचनाएं पुरस्कृत हो चुकी हैं. कविता संग्रह 'सूर्यांगी' के लिए उनको महादेवी ...
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