शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Friday, 29 November 2013
अखबारों से ज्यादा लोग फेसबुक पर-कीर्थिगा
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फेसबुक इंडिया की हेड कीर्थिगा रेड्डी का कहना है कि अखबारों से ज्यादा लोग फेसबुक के प्लेटफार्म पर हैं। आपने 2010 में पहली एंप्लॉयी के तौ...
Friday, 22 November 2013
दलित साहित्य में स्त्री विमर्श
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संजीव खुदशाह स्त्री विमर्श आज अपनी ऊचाईयां छू रहा है और समाज को एक नारी के प्रति नये दृष्टि कोण से देखने के लिए प्रेरित कर रहा है, साथ...
Thursday, 21 November 2013
अस्पृश्यता और हिंदी दलित लेखन
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डॉ. शेख अफरोज फातेमा भारतीय संस्कृति दुनिया के महान संस्कृतियों में से एक मानी जाती है। ऐसी महान संस्कृति में अस्पृश्यता एक कलंक के र...
Tuesday, 19 November 2013
बम्मड़ जी
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सबका पानी सोख रहे हैं कोठी वाले बम्मड़जी, छप्पर-छप्पर भौंक रहे हैं कोठी वाले बम्मड़जी। और कहीं पर लेब-न-देब कुर्ते में 'स्विस...
Sunday, 17 November 2013
ओमप्रकाश वाल्मीकि भी नहीं रहे
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चलते-चलाते इस वर्ष का आखिरी माह हिंदी साहित्य जगत के लिए न जाने कितने आघात लेकर गुजर रहा है। हाल के दिनो में एक-एक कर कई एक दिग्गज साहित्...
Saturday, 16 November 2013
मुंड़ेरों पर गौरैया
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देवेंद्र आदमी का इतिहास जब कभी सही ढंग से लिखा जायेगा तो चाहे उसमें चक्रवर्ती सम्राटों और उनकी लड़ाइयों का जिक्र न हो, गौरैया का जिक्र ...
Friday, 15 November 2013
अतीत के नज़ारे मेरी आंखों के सामने
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व्लादीमिर गिल्यारोव्स्की 1934 में व्लादीमिर गिल्यारोव्स्की की पुस्तक है ‘मास्को और मस्कोवासी’। उसकी भूमिका में उन्होंने लिखा: “मैं मा...
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